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बिजनेस प्लान कैसे बनाए| Bussiness Plan kaise banaye

 बिजनेस प्लान कैसे बनाए Businesses प्लान बनाने से पहले कुछ बातों का हमे विशेष खयाल रखना चाहिए- सर्वप्रथम तो ये देखना है हम पहले से अगर कुछ छोटा मोटा काम कर रहे है या जैसा भी व्यवसाय कर रहे है, उस बिजनेस ( Bussiness) को बेहतर कैसे बना कते है यानी जो हम कर रहे है उसमे अच्छी सफ़लता क्यों नही मिल रही है हम गलती कहा कर रहे है ये देखना बहुत जरूरी है। एक सबसे बडी बात ये भी आपके व्यवसाय में जब भी आप शुरू करते है उसके आय व्यय का हिसाब आपके पास होना चाहिए,यानी की ये देखना जरुरी है कि आप ने कितने फायदा कमाया या कितना नुकसान गया, कितना उसपर खर्च आया और कितना लास्ट में बचा है,ये देखना बहुत जरुरी है। जिस काम को कर रहे हो या शुरू करना चाहते हो उसमे ये देखना आवश्यक है की उसे हम दुसरे से बेहतर या दूसरों से अलग कैसे कर सकते है या ग्राहक के समक्ष प्रस्तुत कैसे कर सकते है जिससे वो दूसरों से अलग दिखे। व्यवसाय शुरू करने की लिए निजी भवन या बिल्डिंग की जरूरत नही होती है, आप इसके किराए में ही वहा बेहतर कर सकते हो इसलिए ये विचार ना लाए की मेरे पास अच्छी बिल्डिंग नहीं है। बिजनेस ( Bussiness) हमेशा 1000 दिन म

दशरथ मांझी की कहानी || Dashrath Manjhi ki kahani

 दशरथ मांझी की जीवनी

दशरथ मांझी का जन्म बिहार के गया में हुआ था ,बिहार के गया के पास एक गांव गहलौर है जो उनकी जन्म स्थली है।उनका  जन्म 14 जनवरी 1929 को हुआ था ,आपका जीवन आपकी दृढ़ निश्चता के कारण प्रसिद्ध हो गया ,उनके जीवन में  लक्ष्य निर्णाधरण के कारण उन्होंने जो सोचा वह कई वर्षों के संघर्षों के परिणाम के कारण उन्हें प्रसिद्धि मिली, हमारे जीवन में भी सफलता एक दिन में नहीं मिलती हैै पर एक दिन जरुर मिलती है।

                 जीवन में सफलता के लिए वर्षों तक संघर्ष कर मन में विश्वास लेकर निरन्तर कार्य को करते रहने से उनके अन्दर इतनी उम्र होने के बाद भी विश्वास कम नहीं हुआ और वो सफल होने में कामयाब हुए।

दशरथ मांझी की प्रसिद्धि का कारण

दशरथ मांझी जब कार्य के लिए बाहर जाते थे तो उन्हें एक पहाड़ को पार करके काम के लिए जाना पढ़ता था,लेकिन अगर उस पहाड़ को पार नहीं करते हैं तो दूसरे रास्ता बहुत ज्यादा लम्बा पढ़ता है ,उसकी वजह से दशरथ मांझी हमेंशा पहाड़ को पार करके ही जाया करते थे ।एक दिन प्रतिदिन की भांति जब दशरथ मांझी काम पर गये हुए थे ,व उनकी पत्नि फाल्गुनी देवी रोज की तरह उन्हें खाना देने पहाड़ पार करके खाना देने जा रही थी ,तभी अचानक उनकी पत्नी का पैर फिसल जाता है और वह गिर जाती है ,पहाड़ उँचा होने से गिरने की वजह  से उनकी मृत्यु हो जाती है।दशरथ मांझी को इसका बहुत दु:ख होता है, वह उसी दिन दृढ़ निश्चय कर लेते हैं कि मैं इस पहाड़ को तोड़ कर रास्ता बनाऊंगा।

             दशरथ मांझी दृढ़निश्चय करके एक छैनी और एक हथौड़ा लेकर पकाड़ को काटना अकेले ही शुरु कर देते हैं,उनकी उम्र होने के बाद भी कितने ही वर्ष हो जाने पर भी लगे रहे लगभग 20 वर्षों में उन्होने वहां लगातार मेहनत करके पहाड़ को काट कर रास्ता बना दिया है।उनके संघर्ष के कारण उनको सफलता प्राप्त हुई।सफलता के लिए संघर्ष जरुरी है वो भी सतत होना चाहिए,सफलता आपके कदम चूमेगी।

दशरथ मांझी का उपलब्धि

दशरथ मांझी के एतिहासिक  कार्य के कारण उन्हें " माउंटमैन" के नाम से भी जाना जाने लगा,सरकार द्वारा आपके इस संघर्ष व आने वाली पीढ़ियों को अच्छा संदेश मिले,और आपके संघर्षों का सम्मान मिले इस हेतु बिहार सरकार द्वारा आपको 2006 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया ।

दशरथ मांझी के जीवन से सिख

दशरथ मांझी का जीवन हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाता है,हम अभावों में रहकर भी जीवन यापन कर सकते हैं,अभाव में जीवन जीने के बाद भी हम जो सोच रहे हैं,या जीवन में जो करना चाहते है हमारे दृढ़निश्चय के कारण हम कर सकते हैं,हमें जीवन में संघर्षों से सम्मान मिल सकता है,हमारे कार्यों की सराहना हो सकती है।उसके लिए हमें हमारा प्रयास और संघर्ष जारी रखना चाहिए।

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