Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2022

स्वयं पर नियंत्रण कैसे रख सकते है? swayam par niyantran kaise rakh sakte hai

खुद को नियंत्रित कैसे रख सकते है |   जीवन में हम हमेशा किसी कार्य को लेकर या कुछ ऐसा हमारे साथ गठित हो जाता है जिससे हम स्वयं को नियंत्रित नही कर पाते है | हम ऐसे परिस्थिति में कुछ गलत कदम उठा लेते है ऐसे में हमे क्या करना चाहिए | उसके लिए हम कुछ टिप्स आपसे शेयर करेंगे |                   हमे हमारी मनः स्थति को सय्यमित रखने के लिए  हमे सबसे पहले धैर्य रखना चाहिए | धैर्य आपकी उस स्थति के परिणाम को कुछ अच्छी जगह पर ही लेकर ही जायेगा | इसलिए जब भी कुछ ऐसी विपरीत परिस्थितियां बनती है उसमे हमे घबराना नहीं चाहिए | हड़बड़ाहट में हम हमेशा कुछ न कुछ गलती कर बैठते है | इसलिए कुछ भी ऐसा होने पर या तो क्रोध को स्वयं पर हावी न होने दे या दुःख की परिस्थिति बनती है तो स्वयं को ऐसा फील होने से रोके की में अंदर से टूट चूका हु या अब में कुछ नहीं कर सकता हूँ |        हमारे मन में उस कमी को जिसे हम पाना चाहते है या किसी चीज जिसे हमे पाने क लिए प्रयास किया था उसके खोने या कम होने पर मन में ये विचार लाना चाहिए की जो गया हे शायद वो हमारे लिए ठीक नहीं था मुझे जिंदगी उससे भी कुछ अच्छा देने जा रही है इसी लि

एक आदर्श व्यक्ति कैसे बनें? | How to become an ideal person?

एक आदर्श व्यक्ति कैसे बनें?|How to become an ideal person? अपना व्यक्तित्व ही व्यक्ति की पहचान होती है। व्यक्ति जितना अधिक अपने आचरणों में परिवर्तन लायेगा,वैसा ही उसका आचरण होता जायेगा,जिस प्रकार से उसका आचरण रहेगा,उसका कद भी वैसा ही बढ़ता व घटता रहेगा।एक आदर्श व्यक्ति में कई प्रकार के गुण विद्यमान रहते हैं।एक आदर्श व्यक्ति बनने के लिए हमें अपने आप को तैयार कर बहुत सी खुशियों को त्याग कर अनुशासन के साथ जीवन जीना होता है ।अनुशासनात्मक व इमानदार व्यक्तित्व ही आपको एक आदर्श व्यक्ति बना सकते हैं।  आदर्श व्यक्ति में क्या क्या गुण होने चाहिए? आदर्श व्यक्ति में बहुत सारे गुणों का समावेश होता है।कुछ की जानकारी इस प्रकार है। 1.एक आदर्श व्यक्ति हमेंशा सत्य बोलते हैं,मिथ्या शब्द से कोसो दूर रहते हैं। 2.हमेशा ईमादार रहकर ईमानदारी से कार्य करते हैं। 3.एक आदर्श व्यक्ति समय के पाबंद रहते हैं,जिस समय पहूंचना है उसी समय पर पहूंचते हैं। 4.वचन के पक्के होते है।अपनी बात पर अटल रहते है। 5. हमेंशा दूसरों का सुख देखना पसंद करते हैं,स्वयं के कारण किसी को दु:खी नहीं करते हैं। 6.सभी को साथ लेकर चलते हैं,ऊंच

ब्लॉग में क्या लिखते हैं? || Hindi Blog Me Kya Likhte h

 ब्लॉग में क्या लिखते हैं? ब्लॉग कैसे लिखें? ब्लॉग में लिखते समय हम यह तय करना चाहिए ,कि ब्लॉग जो हम बना रहे है वो किस विषय पर हम लिख रहे हैं।अगर हम अलग अलग विषय पर लिखना प्रारंभ कर देंगे तो पता ही नहीं चलेगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं।विजिटर्स भी आपके ब्लॉग पर फिर कम आयेंगे।हमारा ब्लॉग सबसे अलग होना चाहिए।हम जिस विषय पर लिखने का प्रयास कर रहे है ,उसकी जानकारी हमें होना चाहिए। जब भी हमारा कही आने जाने का लगा रहता है ,तो हम एक पेन व डायरी साथ में रखे।जिस विषय पर हमारा ब्लॉग है उस विषय के बारे कुछ भी जानकारी हमें मिलती है तुरन्त डायरी में नॉट कर लेना चाहिए।व नॉट करने के पश्चात फिर से हमें अपने मार्ग की ओर गन्तव्य कर लेना चाहिए। अच्छा ब्लॉग कैसे लिखे? अच्छा ब्लॉग लिखने से पहले अच्छे ब्लॉग की या अच्छे विषय की जानकारी होना चाहिए।क्योकि जब हमें अच्छा विषय मिलेगा तभी हम अच्छा लिख पायेंगे।हमारे अच्छे ब्लॉग में हम ये जानकारी एकत्र कर लेते है कि हमें किस विषय में क्या विषय वस्तु अच्छे से डालना है।हमारे ब्लॉग में हमें हैडिंग ,सब्हेडिंग ,पेरेग्राफ कहा लगाना है,कहां पर हमें सिंबोल लगाने है ,

मेरे गांव कराड़िया तह.रामपुरा जिला नीमच में सुखला भरने की मशीन बनाई गयी।

 प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है।  written by-Dashrath rawat जी हा ये कर दिखाया है हमारे गांव के किसान के पुत्र दिलीप पिता देवकरण जी रावत मीणा ने जो किसी प्रकार की इंजीनियरिंग की पढ़ाई या विशेष कोईपढ़ाई नहीं कर रखी है उसके बावजूद अपनी प्रतिभा के दम वेल्डिंग मशीन के माध्यम से जो गेहूँ का सुखला ट्रेक्टर या ट्राले में भरने के लिए पाईप के माध्यम से ज्यादा मजदूरों के पैसा बचानेके लिए व कम समय में कार्य समाप्त करने के उद्देश्य से सुखला भरने की मशीन का निर्माण किया है।जो गांव के व्यक्ति ने ही कर दिखाया है। आपने कही जाकर किसी प्रकार की ट्रेनिंग या कुछ नहीं लेकर बहुत सारे कृषि के उपकरण भी बनाये हैं।आप चार पाई खटिया से लगाकर बहुत सारे कार्य अपनी बुद्धि से करते आ रहे हैं। ऐसे प्रतिभा शाली किसान पुत्रों को शासन से सहयोग मिलना चाहिए,ताकि ये गांव के साथ क्षेत्र का व देश का नाम रोशन कर सके।

ego| घमण्ड क्या होता है? घमण्ड करने से क्या नुकसान होते हैं।

 ego| घमण्ड क्या होता है? व्यक्ति जब अपने पास उपलब्ध किसी संसाधन या कुछ अलग होने के कारण जो अन्य के पास अभाव रहता है का होने पर सामने वाले को ये सब दिखाने का प्रयास करता है,बार बार उस चिज को बताकर ऐसा जाने का प्रयास करता है कि मेरे पास उक्त चिज या अलग चिज है,ये घमण्ड के अन्तर्गत आती है। ऐसा हम किसी को जताने का प्रयास अगर करते हैं तो ये घमण्ड की श्रेणी में आता है।हमें इससे बचने के लिए साधारण जीवन की कल्पना करना चाहिए।व साधारण जीवन जीना चाहिए।हमारे पास कितने ही पैसे या संसाधन उपलब्ध हो जाये,हमें किसी अन्य को नीचा या छोटा दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिये।घमण्ड करने से व्यक्ति के मान सम्मान से लेकर बहुत सारे नुकसान का सामना करना पढ़ सकता है।  ego| घमण्ड करने से क्या क्या नुकसान हो सकते हैं? 1.जीवन में घमण्ड करने से आपके मान सम्मान में कमी हो जाती है। 2. हम बार बार ऐसी प्रवृति रखने पर हम स्नेहीजनों या मित्रों से दूरियां बन जाती है। 3.कोई भी समझदार व्यक्ति आपसे बात करना पसंद नहीं करेगा। 4.घमण्ड के कारण जोश या आवेश में आकर हम गलत निर्णय ले सकते हैं। 5.घमण्ड के कारण लिये गये कुछ फैसलों में हम

जैसा हम सोचते हैं,वैसा हम बन जाते हैं।

 जैसा हम सोचते हैं,वैसा हम बन जाते हैं। जीवन में व्यक्ति बढ़ा या छोटा व्यक्ति  उसकी सोच से बनते हैं।सोच ही व्यक्ति को उसके भविष्य को तय करती है।हम हमारी सोच को जिस प्रकार से बनाना चाहते हैं,हम वैसा ही बन जाते हैं।क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जैसा आप सोचते हैं वैसा ही होने लगता है या हम करने लगते हैं।तो आईये हम बहुत कुछ इसके बारे में विस्तृत से जानते हैं। जैसे हम कही गुमने के लिए गए और हम घूमते हुए किसी ऐसी चिज के बारे में सोचते हैं जो हमें पसंद आती है तो पहले मन होता है फिर हम खरीद कर उसे प्राप्त कर लेते है।यानी मन ने चाहा व शरीर के अंगो ने वैसा कार्य करना प्रारंभ कर दिया ।और जैसा सोचा था के इसे हम खायेंगे ,तो खरीद कर खा लिया ।तो जीवन भी कुछ ऐसा ही है ,हम जैसा सोचने लगते हैं हम वैसा ही बन जाते हैं व हम वैसा ही रिएक्ट भी करने लगते हैं। जिसके परिणाम स्वरुप हम वैसा ही बन जाते है।इसलिए कहा गया है कि जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही हम बन जाते हैं। सोच से कैसे प्रभावित होते है? आदमी की सोच जितनी ऊंची होगी ,उनके सपनो के महल भी उतने ही प्रभावी होगें ।हम जितना बढ़ा सोचेंगे ,हमारे कार्य भी उतने

हमारी भाषा शैली कैसी होना चाहिए ? हमें वार्तालाप करते समय किस प्रकार की भाषा शैली का प्रयोग करना चाहिए?

 हमारी भाषाशैली कैसी होना चाहिए? हमारी भाषा शैली सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करने वाली होनी चाहिए।वो ना चाहकर भी हमें सुनने के लिए उतावला या लुभावना लगना चाहिए। जब हमारा संवाद होता रहता है तो हमारी शैली अच्छी नहीं होगी तो सामने वाला या तो आपकी बात को नजर अंदाज कर देगा।या फिर अगली बार आपसे बात करना पसंद नहीं करेगा।वही अगर आपकी भाषा शैली अच्छी होगी तो सामने वाला आपकी भाषा से प्रभावित होकर यानी आपकी शैली अच्छी होने के कारण आपको सुनना पसंद करेगा।  हमें संवाद करते समय किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना चाहिए? जब हम संवाद करते हैं तो हमारी शैली सभी को अच्छी व प्रभावित करने वाली होना चाहिए।जिससे सब आपसे प्रभावित हो जाकर आपको पसंद करते है।हमारे संवाद से किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए,हमें शब्दों का प्रयोग कुछ इस तरह से करना चाहिए ताकि कोई हमारे शब्दों के कारण उसके मन को ठेस नहीं पहूंचे। जब हम किसी व्यक्ति को हमारे शब्दों के द्वारा प्रभावित करते हैं तो उसके मन में सुखद आनन्द का अनुभव होता है।वही कटु शब्दो के माध्यम से हम सामने वाले के मन को दु:खी करके हम अपने आपको सामने वाले की नजरों में गिरा द

असफलता क्या होती है ? उससे हम कैसे सिख ले सकते हैं?

 असफलता हार नहीं ,नये युग की शुरुआत है? जीवन के हर रास्ते पर ठोकर खाते हैं,जब भी हम अपनी राह बनाना चाहते हैं,हमारी राह में रोढ़े आते रहते हैं।जब हम उनसे निराश होकर उस कार्य को करना छोड़ देते हैं तब उसे असफलता कहते हैं।         परन्तु जब हम सिख लेने के लिए किसी से सलाह या मशवराह करते हैं तो वो हमें सही सिख दे रहा होता है ये जरुरी नहीं है।जब हम अपनी जिंदगी कभी किसी असफलता से सिख लेकर ये निश्चय करते हैं कि मैं ऐसी गलती अब नहीं करुंगा ,व दोबारा पुन: प्रयास करते हैं तो हमारे जीवन में सफलता जरुर मिलती है । असफलता ही सफलता की कुंजी है। जीवन में व्यक्ति या तो सफलता हासिल करते है,या फिर असफल होते हैं।जब हम किसी कार्य के प्रति अपना कर्तव्य करते रहते हैं,उसका प्रतिफल वैसा हमें नहीं मिलता है जिससे हम निराश हो जाते हैं,और हमें असफलता मिलती है,उसके साथ ही हमें ये भी सिख मिलती है कि हमने किस प्रकार से कर्तव्य का निर्वहन किया है।जिसका परिणाम ऐसा आया है ,उस को पुन: हम सुधारने का प्रयास करते हैं,जिसे हम सुधारने का प्रयास करते है वही इस असफलता की कुंजी है। असफलता इंसान के जहन में या तो निराशा लाती

सुन्दरता क्या होती है ?Sundarta kya h?

 सुन्दरता क्या होती है ? इसे कैसे जाना जाता है।  सुन्दरता या सुन्दर शब्द जब भी व्यक्ति के जहन में आता है तो उसके मन में किसी स्त्री या पुरुष के चेहरे की सुन्दरता के बारे में व्यक्ति के मन में विचार आने लगते हैं। व्यक्ति सोचने लग जाता है कि ये बस इसी बात की बात हो रही है वह सिर्फ रुप के बारे में ही सोचने लगता है।             आज मैं आपको व्यक्ति की मन की सुन्दरता के बारे में बताऊंगा।जब हम किसी के चेहरे से उसकी सुन्दरता का आंकलन करते है तो वह असल में गलत होता है। व्यक्ति का मन साफ होना चाहिए,किसी के बारे में गलत विचार नहीं रखते हुए ,हमेंशा दूसरे के हित के बारे में चिंतन करते रहने वाले व्यक्ति के मन की सुन्दरता सबसे महान होती है।हमें व्यक्ति के गुणों को देखते हुए उस व्यक्ति की सुन्दरता का आंकलन करना चाहिए कि ये किस प्रकार से सुन्दर है। या कितना सुन्दर है।          सुन्दरता को जानने के लिए व्यक्ति का मन ,उसके विचार व उसका व्यक्तित्व देखना चाहिए ।उसके आधार पर ही किसी  व्यक्ति की सुन्दरता का आंकलन होता है ,ना कि उसके चेहरे को देखकर ।जो चेहरे देखकर सुन्दरता का आंकलन करते है वे हमारा साथ बीच मे

पानी में तैरने के क्या फायदे है ? Pani Me Terne K Fayde

पानी में तैरने के फायदे की जानकारी|Pani me terne K fayde पानी में तेरने(swimming) के कई फायदे होते हैं।हमें बस ये सहज लगता है कि पानी में तैरना सिर्फ आनंद के लिए करते होंगे,परन्तु इसके कई अन्य फायदे भी होते हैं।पानी जीवन का हिस्सा है,हमारे शरीर में भी अत्यधिक मात्रा मैं पानी उपलब्ध होता है।इसलिए जीवन भी पानी का हमारे लिए अत्यधिक महत्व है।पानी के महत्व के साथ तैरना भी पानी से जुड़ हुआ विषय है जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक होता है।तैरने से हमारे शरीर को अत्यधिक लाभ होते हैं। पानी में तैरने (swimming)से हाथ-पांव का व्यायाम होता है। पानी में तैरने (swimming)  के लिए जब हम नदि नाले या तालाब में कूदते हैं तो जैसे ही कूदन के पश्चात हम डूबने लगते हैं डूबने से बचाने के प्रयास में हाथ पैर दोनो को हिलाकर हम तैरते हैं,जिससे हाथ व पांव का बार तैरने के प्रयास में किया गया प्रयास हाथ व पांव का अभ्यास हो जाता है ,जिससे हमें अच्छा महसूस होता है। इसलिए तैरने के फायदें में सबसे पहले हमारे हाथों व पांव का अभ्यास अच्छे से हो जाता है। पानी में तैरने (swimming) से फेफड़ों का व्यायाम भी होता है। जब हम पानी में