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Showing posts from March, 2022

स्वयं पर नियंत्रण कैसे रख सकते है? swayam par niyantran kaise rakh sakte hai

खुद को नियंत्रित कैसे रख सकते है |   जीवन में हम हमेशा किसी कार्य को लेकर या कुछ ऐसा हमारे साथ गठित हो जाता है जिससे हम स्वयं को नियंत्रित नही कर पाते है | हम ऐसे परिस्थिति में कुछ गलत कदम उठा लेते है ऐसे में हमे क्या करना चाहिए | उसके लिए हम कुछ टिप्स आपसे शेयर करेंगे |                   हमे हमारी मनः स्थति को सय्यमित रखने के लिए  हमे सबसे पहले धैर्य रखना चाहिए | धैर्य आपकी उस स्थति के परिणाम को कुछ अच्छी जगह पर ही लेकर ही जायेगा | इसलिए जब भी कुछ ऐसी विपरीत परिस्थितियां बनती है उसमे हमे घबराना नहीं चाहिए | हड़बड़ाहट में हम हमेशा कुछ न कुछ गलती कर बैठते है | इसलिए कुछ भी ऐसा होने पर या तो क्रोध को स्वयं पर हावी न होने दे या दुःख की परिस्थिति बनती है तो स्वयं को ऐसा फील होने से रोके की में अंदर से टूट चूका हु या अब में कुछ नहीं कर सकता हूँ |        हमारे मन में उस कमी को जिसे हम पाना चाहते है या किसी चीज जिसे हमे पाने क लिए प्रयास किया था उसके खोने या कम होने पर मन में ये विचार लाना चाहिए की जो गया हे शायद वो हमारे लिए ठीक नहीं था मुझे जिंदगी उससे भी कुछ अच्छा देने जा रही है इसी लि

सबसे बड़ा रोग ,क्या कहेंगे लोग ? || Log kya Kahenge

 लोग क्या कहेंगे ? ऐसा सोचना सही है ? जीवन में हमें आगे बढ़ने के लिए संघर्ष जीवन का हिस्सा बनकर ही हम आगे बढ़ते हैं। जिसमें हमें सलाह देने वाले की कमी नहीं रहती है । भले ही स्वयं कुछ नहीं कर रहा है वह बिल्कुल फ्री बैठा है ,फिर भी वह दूसरों को सलाह जरुर देता है कि तु तेरा भविष्य कैसे बना सकता है ।ऐसे रायचंदों की भरमार देश में भरपुर है। ऐसे बहुत सारे लोग आपको मिलते रहते होंगे, जो कुछ ना कुछ सलाह देकर कहते हैं , कि ऐसा मत कर ऐसा हो जायेगा । फिर हमारे मन में भी प्रश्न उठने लगते हैं कि कही मैं ऐसा करुंगा तो लोग ऐसा कहेंगे ? ये सोच हमारे जीवन के भविष्य को बर्बाद कर देती है। हमें किसी की परवाह किये बगेर हमें जो अच्छा लगता है वह कार्य करना प्रारंभ कर देना चाहिए। लोग क्या कहेंगे ? ये सोच कभी भी मन में नहीं लाकर हमारे कार्य को प्रारंभ कर देना चाहिए। लोग क्या कहेंगे ? ये सोच कितना नुकसान करती है ? लोग क्या कहेंगे ये जीवन के उज्जवल भविष्य को रोकने व नुकसान पहूंचाने वाली पंच लाईन है। जो बहुत ज्यादा नुकसान आपका कर सकते है। जैसे की आपने जूते बेचने का कार्य प्रारंभ किया और किसी ने कहा कि आप जूते बेच

Occar 2022 Coda Movie || आस्कर 2022 कोडा फिल्म की कहानी

 ऑस्कर फिल्म कोडा की जानकारी ऑस्कर अवार्ड दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म अवार्ड है, जिसका इंतजार दुनिया भर में लोग करते हैं ।यह 2022 का फिल्म ऑस्कर अवार्ड कैलिफोर्निया स्थित लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थियेटर में आयोजित किया गया। फिल्म कोडा ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। फिल्म की कहानी इस फिल्म में एक परिवार है जिसमें कुल 4 सदस्य हैं। जिसमें  भाई बहिन माता-पिता है। इस परिवार का पालन पोषण मछलियों  के पालन पोषण से ही चलता है । एक रुथ नाम की लड़की है  जो परिवार से अलग स्वभाव है। वह  अलग ही सुन सकती है बोल भी सकती हैं ,बाकी के तीन सदस्य बधीर हैं ना सुन सकते हैं ना बोल सकते हैं। परिवार के सदस्य व दुनिया के बीच बातचीत करने का माध्यम होती है ,रूथ एक म्यूजिक टीचर से मिलती है ।वह टीचर खुद को एक अलग दुनिया से परिचित करवाती है । फिल्म में क्या विशेष है। यह फिल्म सभी का ध्यान आकर्षित करती है क्योंकि इसमें मुक बधिर लोग है, जो दुनिया को इशारों में समझाते हैं और इशारों में ही सांकेतिक भाषा का प्रयोग कर पूरा जीवन समझाते  हैं ।जो दुनिया के लोगों को बहुत पसंद आते हैं। वे दुनिया के सभी व्यक्तियों से अ

जल ही जीवन है || Jal Hi Jiwan H

 जल ही जीवन है। जल ही जीवन का आधार है। जल के बीना सबकुछ अधुरा है, क्योंकि जल ही है जो सम्पूर्ण सृष्टि पर मानव जाति व सभी जीव जन्तुओं को जीवित रखने में सहायक है। जल के बीना जिवित रहना अत्यन्त मुश्किल कार्य है।हमारी पृथ्वी पर लगभग 71% ही पानी भरा हुआ है । 29% प्रतिशत जमीन है जिसमें वन सम्पदा से लेकर प्रत्येक प्रकार की भूमि आ गयी है। जल के बीना व्यक्ति के जीवन की शुरुआत नहीं होती है इसलिए कहा गया है कि जल ही जीवन है। जल व्यक्ति की आधार भूत आवश्यकता है जिसके बीना उसका जीवन ही पूर्ण नहीं हो सकता है।इस लिए जल का दुरुपयोग नहीं करते हुए अनावश्यक रुप से पानी का अपव्यय नहीं करना चाहिए। जल की उपयोगिता का महत्व  जल का महत्व तो नाम सुनते ही समझ आ जाता है कि जल कितना महत्वपूर्ण है।फिर भी इसका उपयोग के बारे में कहे तो सुबह चाय पीने से प्रारंभ करते है तो मुंह धोने व ब्रश करने तक इसका उपयोग से लेकर नहाना शौचालय व खाना बनाने से लेकर शाम के सोने समय तक पानी की दिन भर आवश्यकता रहता है क्योंकि पानी के बीना सबकुछ अधुरा रहता है।पानी ही है जो जीवन के कार्य में उपयोग में लाया जाता है। पानी की अत्यधिक उपयोगीत

घर बैठे फ्री में पैसे कैसे कमाये ? Gar baithe free me Paise Kaise Kamaye ?

घर बैठे फ्री में पैसे कैसे कमाये ?  घर बैठकर पैसा कमाने के बहुत सारे तरिके है।उनमें कुछ बताकर उनकी विस्तृत जानकारी भी जानेंगे। 1. घर बैठे पैसे फ्री में  ब्लॉग  पर कंटेट लिखकर भी कमा सकते हैं।  2. घर बैठकर वर्डप्रेस पर कंटेट लिखकर भी पैसा कमा सकते है। 3. YouTube पर चैनल बनाकर कर भी आप आसानी से पैसा कमा सकते हैं। इन सब की पुरी जानकारी भी मिलेगी, इसीलिए पुरा पढ़ना है । घर बैठे ब्लॉग से कैसे पैसा कमाये ? ब्लॉग  से पैसा कमाने के लिए  google  पर जाकर Blogger.com पर जाकर आसानी से अपना gmail आईडी से लॉगिन करके एक अकाउण्ट बनाना है। और उस अकाउण्ट में आप जिस चिज का आप में हूनर है उसके बारे में लिख कर इस पर प्रतिदिन डालते रहिये। 25-30 कंटेंट लिखने के बाद एक Domain खरीदकर अपने ब्लॉग से जोड़कर  आप Google Adsense के लिए Apply कर सकते हैं।आपका एडसेंस एप्रुव होने के बाद डॉलर में पैसा आना प्रारंभ हो जाता है ।उसे बैंक द्वारा भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर उपयोग किया जाता है। WordPress ||घर बैठे पैसे वर्डप्रेस से कैसे कमाये ?  ये भी  ब्लॉग  जैसा ही होता है जिसमें कंटेट लिखकर अच्छी क्वालिटी के डालना रहता ह

सेमिनार क्या होता है? Seminar Kya Hora H ?

 सेमिनार क्या होता है ? एक ऐसे अनुभवी व्यक्ति या व्यक्तियों के समुह द्वारा ऐसा आयोजन जिसमें किसी एक विषय को लेकर बुलाये गये व्यक्ति को उस विषय की समझ करवाने का कार्य जिस जगह होता है उसे सेमिनार कहा जाता है। जैसे आप एक विद्यार्थी हो और आपको आपके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए एक आयोजन किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के द्वारा रखा जाता है जिसमें अच्छे व्यक्ति को बुलाकर आपको भविष्य कैसे उज्जवल किया ये जानकारी दी जाती है तो इस पुरे आयोजन को ही सेमिनार कहा जाता है। सेमिनार में आप अच्छा सिख सकते हैं।जिससे आप जिस क्षेत्र में कार्य रत है उस क्षेत्र में बेहतर करने की ऊर्जा आपको मिल जाती है। सेमिनार के लाभ क्या है ? सेमिनार के बहुत सारे लाभ होते हैं। 1. सेमिनार में जाने से हमारे अन्दर ऊर्जा का संचार होता है। 2. सेमिनार आपके सभी संशय को दूर कर देता है। 3. इसके माध्यम से आपके भविष्य के कार्य की राह आसान हो जाती है। 4. यह आपके जीवन को सही दिशा में ले जा सकते हैं। 5. जो जीवन में असंभव रहता है उसे संभव बनाया जा सकता हैै। सेमिनार का महत्व  सेमिनार में हमारी उपस्थिति होने के कारण हम इतना कुछ सिख जाते हैं जि

जीवन की परीक्षा किसे कहते हैं ? || परीक्षा क्या है ?

 जीवन की परीक्षा किसे कहते हैं ? परीक्षा शब्द जब हमारे कर्ण सुनने लगते हैं तो सामान्यत: अधिकांश व्यक्तियों के मन में स्कूल में होने वाली परीक्षा याद आ जाती है। जबकि हम आज आपको आपके भविष्य या आने वाला समय कैसा है?  जीवन में आपकी ये जीवन कितनी बार समय समय पर परीक्षा या इम्तिहान लेता रहता है । जब तक हम इस परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो जाते हैं हमारे जीवन में फिर हमारे द्वारा किये गये प्रयास निष्फल ही रहेंगे। परीक्षा वह है जो मुसिबत का सामना व विफलता की चोंट को सहन करके भी आगे बढ़ जाता है वह व्यक्ति की असल मायने में जिन्दगी की परीक्षा में उत्तीर्ण होता है। परीक्षा जीवन में कितनी जरुरी होती है ? परीक्षा के बीना सबकुछ अधूरा है ।क्योंकि आत्मावलोकन करने के लिए परीक्षा का होना अति आवश्य है ।हम कितने पानी में या हम कितना जीवन में आगे बढ़ सकते है इसके चिंतन मनन के लिए व्यक्ति को जीवन बहुत से अवसर प्रदान करना है ।क्योंकि ये कोई कागजों पर ली जाने वाली परीक्षा नहीं है।यह भविष्य निर्माण से जूड़ी हुई आत्मविश्लेषण करने के लिए आत्मचिंतन करने के लिए जीवन में परीक्षा होते रहना चाहिए। जीवन में  परीक्षा के फ

प्रेम एक एहसास कैसे होता है। Prem EK Ehsas Kaise Hota h ?

 प्रेम एक एहसास कैसे होता है?  प्रेम का एहसास आन्तिरिक भावों से उत्पन्न होकर व्यक्ति की खुशी मन्डल पर प्रदर्शित होने लगती है।वही प्रेम का सच्चा अहसास है। प्रेम का रिश्ता बहुत ही मजबूती से निभाने वाला एक बंधन है । प्रेम के एहसास दो दिलों को जोड़ने का कार्य करता है। प्रेम में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है।यह समानता व अपना पन का एहसास कराता हैै। हम अपने प्रिय या मन को अच्छा लगने वाले व्यक्ति के मन की बात या मन के एहसास को हम आसानी से जान लेते हैं। प्रेम एक अहसास के साथ मजबूत रिश्ते का प्यारा सा अहसास है। प्रेम करने के लिए या प्रेम को एहसास हम तब कर सकते हैं जब हम जिस व्यक्ति को ज्यादा पसंद करते हैं।उसे देखकर मन में कुछ अच्छा व अलग ही आनन्द या खुशी का अनुभव होता है। वही वास्तव में प्रेम का अहसास होता है। हम वो एहसास हमारे परिवार में किसी सदस्य के साथ हो सकते है।जैसा सभी माताओं के प्रिय अपने बच्चे रहते है।उनका ममतामयी एहसास उन्हें आन्तरिक खुशी का अहसास कराती है।ये एक प्रेम का अहसास ही है।ऐसे ही प्रेम का अहसास महसूस हम अपनों के साथ कर सकते हैं।  प्रेम एक अहसास है कैसे बता कर सकते हैं ? हमारे

एक गरीब आदमी अमीर कैसे बनें || Ek garib Admi Amir Kaise Bane

 गरीब आदमी अमीर कैसे बन सकता है? इंसान कभी भी गरीब अमीर नहीं होता है, उसकी सोच के हिसाब से ही व्यक्ति वैसा बन जाता है ।  हमारे विचार भी अमीरों जैसे होने चाहिए । पैसा कैसे आयेगा ? पैसा कहा से आयेगा ? गरीब व्यक्ति की सोच हमेंशा ये ही रहती है।मैं काम पर कहा जाऊंगा ,किसके यहां मजदूरी करुंगा? कल क्या खाऊंगा? भले आदमी मेहनत और दिमाग का ऊपयोग कर जहां चाहेगा वहां ये सब मिलेगा बस मेहनत दिमाग से करता जा।जीवन में जो सोचा है सब मिलेगा।   गरीब व्यक्ति को अमीर बनने के लिए क्या करना चाहिए। 1. एक सामान्य व्यक्ति से अधिक समय तक परिश्रम करना चाहिए 2. उसकी सोच का अमीरों जैसी बनानी चाहिए। 3. नियमित मेहनत  करना चाहिए। 4. हमें हमारे विचारों को मालिक बनने की सोच रखकर कार्य करना चाहिए। 5.पैसा को लक्ष्य मानक इमानदारी से काम करना होगा। 6. अधिक पैसा कमाये ऐसा कार्य करना चाहिए। 7. बचत के पैसों का सद्उपयोग होकर पैसा सुरक्षित रखना चाहिए। 8. पैसों से पैसा बनाये ये सोच रखकर कार्य करना चाहिए। 9. सोच हमेंशा उंची रखनी चाहिए। 10. गरीब इंसानों के व्यवहार की सोच में बदलाव करके हमेंशा मालिक बनने की सोच रखना होगी।

बालको का सर्वांगीण विकास कैसे करें ? || Baloka Ka Sarvangik Vikas Kaise Kre ?

 बालकों का सर्वांगीण विकास कैसे करें ? बालक एक मिट्टी के बर्तन की भांति होता है ।इन्हें हम जैसा ढालना चाहते वैसा वो बन जाते हैं। हमें बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए इन्हें मानसिक रुप से, बौद्धिक रुप से व शारिरीक रुप से तैयार करना चाहिए। ताकि वह हर विद्या में निपूण रहे। बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावक या पालक गण व विद्यालय के शिक्षकों का महत्व पूर्ण योग दान रहता है। विद्यालय में शिक्षक  के पास बालक छ: से सात घण्टे रहता है बाकि अधिक समय बालक का घर पर ही रहता है। इसलिए पालक लोगों का भी बच्चे के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहता है। बच्चे का भविष्य पालक व शिक्षक के कार्य के ऊपर निर्भर रहता है। बालक के सर्वांगीण विकास में शिक्षक की भूमिका  || Shikshak ki Bhumika बालक का विकास शिक्षक के हाथों तय होता है ।शिक्षक वह धूरी है जिस पर बालक का भविष्य टीका हुआ है।जिस ओर शिक्षक बालक को ले जाना चाहता है।उस दिशा में ले जा सकते हैं।बौद्धिक विकास व मानसिक विकास व शारीरिक विकास तीनों कलाओं में बच्चों को परिपूर्ण करना ये शिक्षक के उपर निर्भर करता है।  बच्चों के भविष्य का निर्धारण शिक्षक अ

उत्तम स्वास्थ्य के लिए के लिए क्या करना चाहिए || Uttam Swasth K Liye Kya Krna Chahiye

 उत्तम स्वास्थ्य के लिए के लिए क्या करना चाहिए || Uttam Swasth K Liye Kya Krna Chahiye उत्तम स्वास्थ्य के लिए हमें सबसे पहले हमारे शरीर का ध्यान रखना चाहिए।जिसके अन्तर्गत हमें व्यायाम योग करते रहना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण हमें तनाव मुक्त ( stress free)   जीवन जीना चाहिए।पूरे शरीर के लिए ये तनाव सबसे महत्वपूर्ण है जो हमें बहुत सारे अलग अलग प्रकार से शारीरिक कष्ट प्रदान करता हैै। हम क्या करते हैं कि जीवन में छोटी छोटी बातों के लिए मन में बैर या गुस्सा या द्वेष भावना पालकर दूसरे के प्रति वैसा व्यवहार पालने का प्रयास करते हैं जिसके कारण हमारे अन्दर की ये प्रवृतियां हमें वैसा ही बना देती है जिससे हमारे मन व व्यवहार चिढ़चिढा सा हो जाता है। जिसका हमारे  स्वास्थ्य पर असर होता है।इसलिए जीवन में उत्तम  स्वास्थ्य के लिए तनाव मुक्त ( stress free)  जीवन जीना चाहिए। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसना कितना आवश्य है? उत्तम स्वास्थ्य के लिए हमें हंसना उतना ही आवश्यक है जितना पूरे शरीर को सभी पोषक तत्व आवश्यक है। मानसिक तौर पर तैयार रहने के लिए हमें हंसने का स्वभाव रखकर खुलकर हंसी ठिठोले करते रहना चाहिए । कभी

पनघट किसे कहते हैं ? || Panghta Kise Kahte H

 Panghat || पनघट क्या होता है ? ग्रामीण क्षेत्रों में आज पानी भरने के लिए औरते सुबह सुबह पानी भरने के लिए एक हाथ में बड़ी सी रस्सी व एक हाथ में स्टील का घड़ा व चवरी (बड़ा पात्र ) लेकर गांव के समीप कुआ या बावड़ी रहती है वहां पर जाती है।वहां पर रस्सी के माध्यम से पानी बावड़ी या कुई से बाल्टी की सहायता से  खिंचती हैं ।जिस जगह खड़ी  रहकर पानी खिचती है ,उस स्थान को या उस जगह को पनघट बोला जाता है।  Panghat || प्राचीन समय में पनघट कैसे होते थे ? प्राचीन काल में बनाये पनघट पर आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में  महिलाएं पानी भरती है और अब मोटर पंप अत्यधिक मात्रा में सिंचाई के लिए करने लगे है तो अब थोड़ा सा कुए का आकार बदल दिया गया है। प्राचीन समय में पनघट निर्माण में पत्थरों व चूना पत्थर का प्रयोग किया जाता था उसी के माध्यम से उसका निर्माण होता था ।साथ ही बड़े आकार की पत्थर की पतली स्लाईड जैसी पट्टी को काटकर रखा जाता था,व मजबूत नीचे सहारे के लिए भी पट्टी का लगाई जाती थी। व वहां पर खड़े रहकर महिलाएं पानी भरने का कार्य करती है। Panghat || पनघट की पणहारन (पणहारी ) किसे कहा गया हैं? जब पनघट पर महिलाएं अपन

हमें भरोसा किस पर करना चाहिए। विश्वास से जुड़ी कहानी ||Bharose se judhi kahani

 भरोसे की कहानी ||हमें भरोसा किस पर करना चाहिए। विश्वास से जुड़ी कहानी बहुत समय बाद मैं अपने मित्र राकेश  के घर पहूंचा था ,मित्र तो मित्र होते हैं जैसे मैं घर पर पहूंचता हूँ खुशी के मारे दोड़ता हुआ आता है। और हाथ मिलाता है ,जिस पर मैं भी बढ़ा प्रसन्न होता हूं।मैं मित्र के घर पहूंचता हूं तो बहुत समय बाद मिलना होता है तो ऐसे कैसे आने देता दोस्त को तो हम चाय पिलाता है और फिर घर पर संयोग से कार्यालय का अवकाश होने पर दोस्त की माता जी घर पर ही रुकी हुई थी तो उन्होंने शाम का टाईम होने को था तो दोनो के लिए खाना बनाने के लिए कहकर वो किचन की ओर चली जाती है।  मित्र के पिता जी आगमन  मित्र राकेश के पिताजी आ जात् हैं शाम का समय था तो क्योंकि राकेश और मुझे बाते करते करते दिन भर हो गया था । खाना तैयार हो जाता है।   राकेश और मैं व राकेश के पिताजी साथ में खाना खाते हैं,बातचित बढ़ती जाती है जिसके परिणाम स्वरुप मित्र तो मित्र था वह मेरा जाना किसी कारण को प्रदर्शित कर रहा था।और मैं भी हमेंशा की तरह बीना वजह कभी मित्र के घर पर नहीं जाता था। मेरा जो कार्य था उसकी मुझे मेरे मित्र पर पुरा भरोसा था के वो मेरा क

एकाग्रता का जीवन में महत्व क्या है ? || Ekagrata kya hoti h?

 एकाग्रता क्या होती है ? संसार में जब मानव जाती में व्यक्ति बहुतायात में कार्य करता हैं ।प्रत्येक व्यक्ति को संतुष्टि नहीं होती हैै।जिसके कारण वह विचलित रहता है कि मैं ये कार्य करु या फिर वो कार्य करुं।जिस प्रकार से वह कार्य के प्रति विचलित होने पर उनकी एकाग्रता समाप्त सी होने लगती है।और उनका ध्यान भटकने लगते है।मन को एकाग्र रखना जीवन में अतिआवश्यक है।एकाग्र मन जीवन की समृद्ध व खुशियों का कारण बनता है क्योंकि उसके सभी कार्य सही होते हैं। एकाग्रता से विचलित कैसे होते हैं? एकाग्रता से विचलित व्यक्ति वह होता है ,जिसका किसी एक कार्य पर ध्यान ना रखकर अन्य अन्य कार्य में मन लगा रहता है।जिसके कारण वह अपने लक्ष्य से भटक कर विचलित हो जाते है।फिर मन एकाग्र नहीं रह पाता है।वह एकाग्र विहिन बहुत सारी परिस्थितियों से हो जाता है। वह पारिवारिक समस्याओं के कारण ,आर्थिक कारण व अन्य कई कारण हो जाते है जिससे एकाग्रता से विचलित हो जाता हैं। विचलित मन को एकाग्र करके कार्य करने से कार्य में बढ़ोतरी व आसानी से कार्य सफल भी होते हैं।हमें मन को शांत रखकर ,गुस्से का परित्याग कर ,भोग विलासिता में अत्यधिक आकर्ष

मेरी सफलता का राज क्या है ? Safalta ka Raj Kya H?

 मेरी सफलता का राज क्या है? जीवन के उतार चढ़ाव में जिन्दगी हमेंशा सफलतम लोगों को याद रखवाती है।जिस सफलता के मूलमंत्र में हम अपनों का साथ देते हुए कुछ नया करने का संकल्प लेकर कार्य करने में विश्वास रखता हूं।मैं जब भी ज़िन्दगी के पल पल बदले नियमें में उलझता हूं तो हमेंशा सकारात्मक होकर जीवन को खुशी खुशी कैसे आगे व्यतीत करने उसके लिए मजबूत हो जाता हूं। मैं हमेंशा अपने कंधो को मजबूत रखता हूं ,दूसरों को दोष देकर या बहाने बनाने का प्रयास नहीं करता हूं के मेरे ये काम आ गया था ,मैं इस वजह से ये नहीं कर पाया हूं।मैं यह नहीं कर पाया हूं क्योंकि ऐसा हो गया था।मैं हमेंशा अपने कार्य के प्रति जबाबदेही लेकर गलती को स्वीकार्य करता हूं। Success | मेरी सफलता का मूलमंत्र क्या है? मेरी सफलता की शुरुआत बिस्तर से उठने के समय से शुरु हो जाती है। क्योंकि में सुबह 5 बजे प्रतिदिन उठ जाता हूं। क्योंकि दिनचर्य प्रभावित ना हो व आगे के कार्यों में विलम्ब ना हो।उसके पश्चात योग व दौड़ करके दिनभर शरीर सुस्त ना रहे उसके लिए पहले से तैयार हो जाता हूं।अब तैयार हैं संघर्ष के लिए ।हम असफलता में आशा लेकर विश्वास के साथ क

Attitude | नजरिया क्या होता है?

 Attitude | नजरिया क्या होता है ? नजरिया हमारी सोच पर निर्भर करता है हम कैसा सोच सकते हैं,हमारे सोचने का दायरा कितना हैं।हम किसी वस्तु या प्लान के बारे में किस प्रकार से या किस नजरिये से सोचकर समझते हैं और उसके बारे में जानकारी  दे सकते हैं।यह सब हमारी सोचने समझने की क्षमता पर निर्भर करता है।हम कभी भी कही किसी साक्षात्कार या किसी अन्य जगह कार्य के लिए जाते हैं तो हमें हमेंशा हमारे सोच के दायरे को बढ़ा रखकर शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।ताकि सामने वाले का आसानी से हमारी सोच का पता चल सके।हमारे सोचने का नजरिया कैसा है सामने वाले को आसानी से पता चल सके। Attitude | नजरिया कैसा होना चाहिए? हम जितना उच्च व बढ़ा सोचेंगे हमारे सोचने का नजरिया भी वैसा ही बढ़ा होगा। हमारी सोच के दायरे को हमें इतना बढ़ा रखना चाहिए कि सामने वाला आपकी सोच तक पहूंच ही नहीं सके।जब तक हम बढ़ा सोचेंगे नहीं तब तक हम कुछ बढ़ा कर नहीं सकते हैं,क्योंकि हमारे सोचने का दायरा या नजरिया सिमित हो जाता है।जब भी हम हमारा दायरा बढ़ायेंगे हमारी सफलता के उतने ही तंत्र खुलते जायेंगे।हम सफलता की सीढ़ीयों पर चढ़ते जायेंगे।  Attitude |

What Is Network Marketing || नेटवर्क मार्केटिंग क्या है

 What is the Fundamental of Network Marketing?नेटवर्क मार्केटिंग का फंडा क्या है? नेटवर्क मार्केटिंग का सीधे सीधे फंडा यह रहता है कि आपको अपना नेटवर्क बढ़ाकर कार्य करना होता है।नेटवर्क मतलब आपको एक एक व्यक्तियों से मिलकर उन्हें अपने व्यवसाय में जोड़ना रहता है।जोड़ने के पश्चात वो व्यक्ति आपके नीचे और उन्य व्यक्तियों को चैन की तरह जोड़ता रहेगा।इसप्रकार से आपका नेटवर्क या कार्य करने वाले व्यक्ति बढ़ते जायेंगे ,वैसे वैसे आपका व्यापार व्यवसाय बढ़ता जायेगा। हमें इस तरह से नेटवर्क बनाकर अपने व्यापार या व्यवसाय को बढ़ाया जा सकता है।  Network Marketing|नेटवर्क मार्केटिंग में अधिक पैसे कैसे कमाये जा सकते हैं? नेटवर्क मार्केटिंग एक ऐसा व्यवसाय है ,जिसमें असिमित आय होती है।हम जितनी मेहनत व लगन से कार्य करेंगे।आपका नेटवर्क बढ़ता ही जायेगा।ये आपकी काबिलियत आपकी मेहनत व लगन से किये गये कार्य का प्रतिफल रहता है।हम जितनी दुगुनी  ताकत से कार्य करेंगे ,हमें पैसा भी उतने गुना अधिक मिलेंगे।क्योंकि जितना बढ़ा संघर्ष रहता है ।सफलता ही उतनी बढ़ी होगी।ये व्यवसाय में समय देने व संघर्ष करने पर ही पैसा मिलता ह

सुकून के पल | Moments of peace

 सुकून के पल क्या होते हैं?What is moments of peace व्यक्ति भाग-दोड़ भरी जिन्दगी में अपना जीवन व्यतीत करता है। आज प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी परेशानी से झूझ रहा है। हम जीवन को सुकून के पल के साथ जीना चाहते हैं पर वैसा हम कर नहीं सकते हैं।जीन्दगी के शुरुआती दौर में हमारे पास कुछ करने का जज्बा रहता है। फिर धीरे हमें चिन्ता या परेशानी होती है।ऐसे में अपने जीवन व व्यापार व व्यवसाय में कुछ सुकून के पल भी निकाल कर हमें तनाव मुक्त रहकर भी हमारे जीवन को आराम दायक बनाना चाहिए।              जब हमें किसी प्रकार के तनाव मुक्त जीवन में रहना है तो ये सुकून के पल ढूंढना होंगे।ये हमेंशा ऐसी जगह हमें मिलेंगे जहां पर कोई व्यक्ति ना हो।शांत वातावरण हो,व हमारे अलावा कोई ना हो व मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल ना हो,ऐसे स्थान पर बैठकर गहरी सास लेकर ध्यान में बैठकर आराम से मन को एकाग्र करके ध्यान लगाने से हमारे मन को शांति मिलती है।धीरे धीरे बार बार ऐसा करने से मन को एक सुकून सा मिलने लगता है। मन को वहां जाते ही हमेंशा की तरह सुकून मिलने लगता है।जब भी कही जाओगे,उन सुकून के पल की याद आयेगी। सुकून के पल शायरी जीवन

आत्मनिर्भर कैसे बनें?How to become independent?

आत्मनिर्भरता क्या है| How to become independent? आत्मनिर्भरता से तात्पर्य अपने कार्य को स्वयं के द्वारा करने से है ।हमें किसी पर निर्भर नहीं होना है ।हमें अपने आप को तैयार कर अपने व्यवसाय या कार्य को करके आगे बढ़ने के गुणों का विकास कर आत्मनिर्भर बनना है ।ताकी हमें किसी पर निर्भर नहीं होना पढ़े। आत्मनिर्भर होना अत्यन्त जरुरी है ताकी हमें किसी चिज के लिए किसी अन्य के सामने अपने हाथ ना फैलाना पढ़े। आत्मनिर्भर भारत का सपना क्या है? आत्मनिर्भर भारत का सपना देश के प्रधानमंत्री ने देखकर देश के सामने रखा है ।जब हमारे देश आत्मनिर्भर बनेगा तो किसी अन्य देश से हर छोटी चीज मांगने की जरुरत नहीं होगी।इसलिए हमें आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत के लिए हमें कड़ी मेहनत करके अपने स्वयं के व्यवसाय स्थापित करके अपने आप को स्थापित करना होगा। आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता क्यों ? आत्मनिर्भर भारत आज की आवश्यकता है।आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से देश में नये नये उद्योग धंधे स्थापित होंगे।नये उद्योगों से देश में रोजगार के अवसर बनेंगे। जब आत्मनिर्भर भारत बनेगा,तो देश बेरोजगारी कम होगी।