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स्वयं पर नियंत्रण कैसे रख सकते है? swayam par niyantran kaise rakh sakte hai

खुद को नियंत्रित कैसे रख सकते है |   जीवन में हम हमेशा किसी कार्य को लेकर या कुछ ऐसा हमारे साथ गठित हो जाता है जिससे हम स्वयं को नियंत्रित नही कर पाते है | हम ऐसे परिस्थिति में कुछ गलत कदम उठा लेते है ऐसे में हमे क्या करना चाहिए | उसके लिए हम कुछ टिप्स आपसे शेयर करेंगे |                   हमे हमारी मनः स्थति को सय्यमित रखने के लिए  हमे सबसे पहले धैर्य रखना चाहिए | धैर्य आपकी उस स्थति के परिणाम को कुछ अच्छी जगह पर ही लेकर ही जायेगा | इसलिए जब भी कुछ ऐसी विपरीत परिस्थितियां बनती है उसमे हमे घबराना नहीं चाहिए | हड़बड़ाहट में हम हमेशा कुछ न कुछ गलती कर बैठते है | इसलिए कुछ भी ऐसा होने पर या तो क्रोध को स्वयं पर हावी न होने दे या दुःख की परिस्थिति बनती है तो स्वयं को ऐसा फील होने से रोके की में अंदर से टूट चूका हु या अब में कुछ नहीं कर सकता हूँ |        हमारे मन में उस कमी को जिसे हम पाना चाहते है या किसी चीज जिसे हमे पाने क लिए प्रयास किया था उसके खोने या कम होने पर मन में ये विचार लाना चाहिए की जो गया हे शायद वो हमारे लिए ठीक नहीं था मुझे जिंदगी उससे भी कुछ अच्छा देने जा रही है इसी लि

कोशिश करने वालों की कभी हार कैसे नहीं होती है ?|| Koshish Krne Walon ki Kabhi Har Kaise Nhi Hoti Hai

 मेंढक की कोशिश 

विज्ञानं कहता है की मेंढक कभी भी पानी में मर नहीं सकता है,जमींन के निचे दब जाने से भी नहीं मर सकता है| 
          एक बार क्या होता है की दो मेंढक एक दही के बर्तन में गिर जाते है , दही में से बाहर निकना बहुत मुश्किल रहता है ,एक मेंढक ने यह सोच सोच कर की अब हमें मरना है हमारा क्या होगा ये सोच सोच कर ही दम तोड़ दिया| 
    दूसरे मेंढक ने सोचा मरना तो है ही है तो बाहर निकले के कोशिश करना शुरू कर दिया ,चारो पैरों से इतनी ताकत से इधर से उधर उछाला, उधर से इधर ,पांव को जोर जोर से बाहर निकलने के लिए हिलाता है,जिससे दही गाढ़ा हो गया है और बर्तन में ऊपर आ गया और सीधा मेंढक बाहर | 
        एक ने कोशिश जिंदगी की जंग जीत गया जहां उसने सोचा ही नहीं था क ऐसा भी होता है ,ठीक दूसरे ने कोशिश भी नहीं करी और दम तोड़ दिया | 
        कहने का मतलब यही था कोशिश करिये सफलता जरूर मिलेगी| 
                       

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